धरती पर 'स्वर्ग' हैं शीतकालीन चारधाम, उत्तराखंडः

Date :
12-02-2018
Category:

धरती पर 'स्वर्ग' हैं शीतकालीन चारधाम, उत्तराखंडः


भारत के सभी तीर्थ स्थानों में चारधाम को अति पुण्यदायी कहा गया है, लेकिन इसकी पूर्णता तभी मानी जाती है, जब हम देवभूमि उत्तराखंड स्थित गंगोत्री-यमुनोत्री और बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा करते है। शीतकालीन चारधाम यात्रा 2018 की शुरुआत अभी नहीं हुई है पर चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग और रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए । वैसे तो चारधाम यात्रा की शुरुवात हर साल अप्रैल से गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तारीख घोषित होने के साथ हो जाती है इस साल भी ग्रीष्म कालीन चारधाम यात्रा की शुरुवात अप्रैल के महीने से हो जाएगी। मुखबा उत्तरकाशी से लगभग 80 किमी दूर है। यात्री पहले 70 किलोमीटर दूर हर्षिल पहुंचेंगे। यहां से थराली और फिर मुखबा पहुंचेंगे। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद छह माह के लिए मां गंगा अपने मायके मुखबा में विराजमान होती है।

Badrinath Temple Opening in 2018

मंदिर के साथ ताल-बुग्यालों की भी भरमार

शीतकालीन चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को चारधाम के दर्शन करना “धरती पर स्वर्ग” के दर्शन करना जैसा लगता है । जिले में न केवल पौराणिक, एतेहासिक भव्य मंदिर एवं मठ हैं, बल्कि झीले, ऊंचे- ऊँचे पहाड़, सुनहरा मौसम, घांस के मैदान, सुन्दर घाटियो की भी भरमार हैं।
राज्य सरकार ने इस साल से शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने का बीड़ा उठाया है। गंगोत्री धाम की यात्रा का श्रीगणेश अप्रैल 2018 को मुखबा में गंगा के शीतकालीन प्रवास से होना है। सरकार की यह पहल यदि रंग लाती है, तो जिले को न केवल धार्मिक पहचान बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सर्दियों में बर्फीली चादर ओढ़े झीले, ऊंचे- ऊँचे पहाड़, सुनहरा मौसम, घांस के मैदान, सुन्दर घाटियो का नजारा देखने लायक होता है।

शीतकालीन चारधाम यात्रा में आपका स्वागत है!

उत्तराखंड के चारों धामों से देव डोलिया शीतकाल के लिए अपने विश्राम स्थलों से निकलती है | हर साल की तरह गंगोत्री धाम की डोली इस साल भी मुखबा में पहुंचेगी। यमुनोत्री की डोली खरसाली और केदारधाम की डोली ऊखीमठ में जाती है। डोलियों के अपने विश्राम गृह में पहुंचने के साथ उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रस्तावित शीतकालीन चारधाम यात्रा का भी श्रीगणेश हो जायेगा । यात्रा चारधामों से आई डोलियों के स्थापित होने के स्थान पर होगी। विषम मौसम, खराब रास्ते और सहूलियतों की कमी आस्था की कड़ी परीक्षा लेंगे, मगर आध्यात्मिक लाभ की अनुभूति सभी कष्टों को हर लेती है।
बदरीनाथ धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदार धाम के कपाट शीतकाल में लगभग छह माह तक बंद रहते हैं। इस दौरान यात्रा पर विराम लग जाता है। शीतकाल में इन धामों की डोलियां कम ऊंचाई वाले स्थानों पर ले जाने की परंपरा है।

अब सर्दियों में भी कीजिए चारधाम यात्रा

चार धाम यात्रा अब सर्दिओ में भी करवाने के सरकार के इस कदम को क्षेत्र के लिए संजीवनी बताया गया। योजना के मुताबिक चार धामों के कपाट बंद होने के बाद डोलियों के शीतकालीन स्थान तक यात्रा को जारी रखा जाएगा। चार धाम यात्रा पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और चारों धामों के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक का समय नियत है। अभी जनवरी में बद्रीनाथ जी के कपाट खुलने की तारीख घोसित हो गयी | ऐसे में कपाट खुलने के बाद प्रदेश में चार धाम यात्रा केवल छह माह तक सीमित रह जाती है।

Badrinath Temple

चारधाम यात्रा के ऑनलाइन आवेदन के अभी लिए संपर्क करे- Click here for Online Chardham Yatra Registartion

रहें हर खबर से अपडेट Get all India Chardham News and other Religious News in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news of Chardham, India.

1 review for Miss. Anita Sharma

  1. Pune :

    Excellent Char Dham Yatra” Review of Chardham Yatra Deals..We had an excellent and uneventful trip to Char Dham that was extremely well organized and arranged by Mr. RAJA SINGH in person.

Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

            Enquiry Now